माँ की आरती (जय अम्बे गौरी)
दुर्गा माँ — संध्या आरती
🪔 दीप जलाकर शांत मन से पढ़ें या गाएँ।
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
माँग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैन, चारु नासा को॥
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
शुम्भ-निशुम्भ बिडारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥
चण्ड-मुण्ड संहारे, सुर-नर-मुनि जाती।
कोटि यज्ञ उपारे, सब के घाती॥
कोटि भक्त जगत में, तुम्हरी शरण में।
संकट मोचन नाम तिहारो, जग में फैले उजियारे॥
जो कोई माँ को ध्यावे, नित मंगल पावे।
सुख-सम्पत्ति घर आवे, कष्ट निवारे॥
मैया जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शारदानंद स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावे॥
🙏 जय माता दी!